गजेन्द्र मोक्ष | Gajendra Moksh

श्रीमद्भागवत के अष्टम स्कन्ध में गजेन्द्र मोक्ष की कथा है । द्वितीय अध्याय में ग्राह के साथ गजेन्द्र के युद्ध का वर्णन है, तृतीय अध्याय में गजेन्द्रकृत भगवान के स्तवन और गजेन्द्र मोक्ष का प्रसंग है और चतुर्थ अध्याय में गज ग्राह के पूर्व जन्म का इतिहास है । श्रीमद्भागवत में गजेन्द्र मोक्ष आख्यान के पाठ का माहात्म्य बतलाते हुए इसको स्वर्ग तथा यशदायक, कलियुग के समस्त पापों का नाशक, दुःस्वप्न नाशक और श्रेयसाधक कहा गया है। तृतीय अध्याय का स्तवन बहुत ही उपादेय है । इसकी भाषा और भाव सिद्धांत के प्रतिपादक और बहुत ही मनोहर हैं ।

पद्यानुवाद 

संस्कृत – भाव सहित 

(सामग्री – गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित गजेन्द्र मोक्ष पुस्तिका से साभार) – इस लिंक से आप गीताप्रेस द्वारा प्रकाशित पीडीएफ़ पुस्तक प्रारूप डाउनलोड कर सकते हैं

सुनने हेतु / To Listen – संस्कृत आडियो इस लिंक पार जाकर सुन सकते हैं अथवा डाउनलोड कर सकते हैं |  Sanskrut Audio in MP3 can be listened downloaded from here

स्वर – डॉ श्याम सुंदर पराशर | Voice – Dr Shyam Sundar Parashar

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